Ek Prem Geet by Devang Bhardwaj | The Social House Poetry | Whatashort

Ek Prem Geet by Devang Bhardwaj | The Social House Poetry | Whatashort

32 thoughts on “Ek Prem Geet by Devang Bhardwaj | The Social House Poetry | Whatashort

  1. कहते हैं की हर इंसान को अपनी जिंदगी में प्यार होता है । एक बार नहीं कई बार होता है । मगर उसका एक प्यार कुछ खास होता है

  2. बहुत रोने को
    जी चाहता है।
    अश्को में खुद को भिगोने को
    जी चाहता है।
    जिंदा तो हूँ
    पर साँस न लेने को
    जी चाहता हूँ………..
    अविनाश कुमार

  3. इतना सोचकर बस इतना ही सोचा
    इतना सोचकर बस इतना ही सोचा
    कि भरी महफिल मैं तन्हा रहने
    से अच्छा है कि खुद को तन्हा ही
    कर लिया जाए……

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *