क्यों हिंदी साहित्य गुम हो रहा है? | Why hindi literature is dying a slow death?

क्यों हिंदी साहित्य गुम हो रहा है? | Why hindi literature is dying a slow death?

25 thoughts on “क्यों हिंदी साहित्य गुम हो रहा है? | Why hindi literature is dying a slow death?

  1. In India there is a backchutiya mentality that our languages are inferior and English is superior. The irony is that in countries like Germany, where all children have to master german grammar by 6, people have more confidence with English. In Germany, their literature is extremely popular. In India children can't read or write in their native languages so how the hell can they indulge in literature. I admit that I have an inferiority complex as my father always discouraged me from reading and studying Hindi as he said that English is superior and I need it in the workplace. I used to go to the library to read Hindi and I would lie that I am playing sports. In the house, I would always get told to 'Do something useful '

  2. Dii mughe Hindi books bhut psnd h or mughe aisi books chiye jisme raja maharaja Jaise jodha akbar ki stories jaisi books psnd h aap btayengi in books k liye m book seller ko book ka naam kya btau

  3. U r really good….i love reading 2 ….ye first tym Maine apka vdo dekha h….
    Maine premchand ki almost sabhi books bi padhi h…even 'ageya' ki bi '..lekin ab Hindi books mjhse nii padhi jaati…
    Shayad angreji ki Jada hi padh li h….lekin apke vdo's dekhne ke baad…am back to pavilion😂😂😂
    I love listening 2 u…

  4. हिंदी साहित्य के गुम होने, अथवा हिंदी साहित्य में लोगों की रुचि में घटाव का एक प्रमुख कारण है अंग्रेज़ी के साथ जुड़ा हुआ ग्लैमर। अंग्रेज़ी जानने, समझ लेने वाला व्यक्ति सहज ही लोगों की नज़र में ज़्यादा बुद्धिमान एवं प्रतिभाशाली बन जाता है। हिंदी को अथवा हिंदी के पाठकों को ऐसी ठाठ बाट प्राप्त नहीं है। बल्कि कई बार हिंदी पढ़ने वालों को हीन एवं पिछड़ा समझ लिया जाता है।
    इसका एक और कारण है, हिंदी को अंग्रेज़ी की लिपि, यानी रोमन में लिखा जाना। हिंदी के सशक्तिकरण के लिए आवश्यक है कि हिंदी को उसकी अपनी लिपि, यानी देवनागरी में ही लिखा जाए।

  5. I am a Moroccan Booktuber and this video make me sad. Because we live almost in the same situation.
    We need to defend local languages and to defend non-representative literatures.
    I really want to read Indian literature and I will read it in the future.
    I remember that Nawal El Saadawi speaks greatly about it on her autobiography "Mt travels in the world"

  6. who reads 5 books in a month?? people with no job or part time job or those whose job is to read books and make videos!!!

  7. मैं ज्यादातर हिंदी किताब ही पढ़ता हूँ ,
    कुछ suggestions आपके लिए ,

    मुसाफिर कैफ़े
    बनारस टॉकीज़
    दिल्ली दरबार
    Terms and condition apply
    Up65

  8. Im in 10th class and in my school there is option between taking Hindi, Punjabi and Arts. 90 percent of take Arts so ham to hindi padna 8th class se hi chod dete hai 🙁

  9. साहित्य मातृभाषा मे ही सबसे अच्छा लगता है। जो आपकी बोल चाल की भाषा है उसमें कहानी पढना और भावनाओं को समझना आसान होता हैं। दुसरी भाषा के अलावा अपनी मातृभाषा मे भी पढना चाहिए।
    अच्छी विडिओ है और हिन्दी भाषा मे पढऩे के लिए प्रोत्साहित करने के लिए अच्छा संदेश भी है

  10. मनप्रीत मैं सहमत हूं
    दुर्दशा के लिए intelctual बिरादरी भी जिम्मेदार हैं जिन्होंने लोकप्रिय साहित्य को महत्व नहीं दिया

  11. Hindi say achi koi language nehi kuch English bolne walo logo ne Hindi bhasa ko chota samjhte magar hamari bhasa ke gaane par aaj England wale naachte aur jab desh on nation one education nehi hota tab tab yahi hota rahega..ye ladae Hindi English ki balki amiri aur garibi ki hai jab Tak desh me do tarha ki education hogi tab yahi hoga sarkaari school ki aur private school ki education…jab do tarha ki education tab kaha Hindi ka sammaan hoga..

  12. Some unsolicited assistance::
    participate = bhag lena, hissa lena
    Views= vichar, sonch. Opinion= vichar
    Importance=mahatva. Speed=gati
    Slow= dhire. Problem=samasya
    International= antarastriya
    👍

  13. Most of us are hypocrites (including you, sorry)…you are advocating hindi language only because you already know english, why are you using english words in between your monologue? Because you want to give impression that you are not a only-hindi girl. This is same with most of the educated Indians. Honestly speaking, pragmatically, in public, in real life, English has become more popular than Hindi nowadays. That's the sad part!! In countries like Russia, China, Japan etc. we find officers, scientists, doctors, diplomats etc. who can't converse in English. And in India, this is contrary. English takes the front seat otherwise disqualification. NO WONDER WHY INDIAN MEDIA WAS ONCE SO FASCINATED WITH THE SUBJECT OF WETHER AKHILESH YADAV(former chief minister) CAN SPEAK ENGLISH SINCE NO ONE HAS HEARD HIM SPEAK IN ENGLISH EVENTHOUGH HE STUDIED IN THE U.S.A. we Indian are all hypocrites on this subject including you!! SORRY!!

  14. Every word you said is true! I read only mythological books & scriptures in Hindi and I totally love them 😀

  15. अच्छा विषय चुना आपने इस बार मनप्रीत जी, मातृ भाषा बिल्कुल माँ के दूध की तरह है जिस प्रकार बचपन मे माँ के दूध से ही शिशु का सर्वांगीण विकास संभव हो पाता है, ठीक उसी प्रकार मातृ भाषा से शिशु का संज्ञानात्मक विकास ( Cognitive Development ) हो पाता है। परंतु हिंदी पट्टी के राज्यो में ही हिंदी को प्राथमिक शैक्षिक स्तर पर यथोचित प्रोत्साहन नही प्राप्त हो पा रहा है, कितने ऐसे निजी स्कूल है जो हिंदी माध्यम में शिक्षा देते है, न के बराबर , रही बात सरकारी स्कूलों की तो वहाँ पर पर्याप्त आधारभूत सुविधाओं की ही कमी रहती है, जिसमे केवल निर्धन बच्चे ही लगभग पढ़ने जाते है, हिंदी पट्टी राज्यों का मध्य और उच्च वर्ग अंग्रेजी के ग्लैमर (आकर्षण ) से खुद को बचा नही पाया, नतीजा यह है कि अब अंग्रेजी का उपयोग एक स्टेटस सिंबल बन गया है, तो शैक्षिक संस्थान भी आमजन की इस लालसा से लाभ उठा रहे हैं, यह सत्य है हिंदी मन्द गति से मृतप्राय हो रही है। दूसरी बात, हिंदी की अपेक्षा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की इतनी दुर्गति नही है, दक्षिण भारत मे आज भी लोग अपनी क्षेत्रीय भाषा को ज्यादा महत्व देते है।
    अपने इधर अधिकतर मध्य वर्गीय लोगों की स्थिति धोबी का कुत्ता घर का न घाट का वाली है, उनको न पूर्णरूप से हिंदी आयी और न ही अंग्रेजी।
    हिन्दी पढ़नेवालों की संख्या कम नही है, इसका अंदाज़ा तो मात्र समाचार पत्रों के द्वारा लगाया जा सकता है, हिंदी भाषी राज्यो में अंग्रेजी के पेपर कम बिकते है, रही बात किताबो की तो आपने बिल्कुल सटीक विश्लेषण किया है, जब किताबे लिखी ही नही जाएंगी, उनकी अच्छी मार्केटिंग और एडवरटाइजिंग नही होगी, तो लोग जानेंगे कैसे ? अंग्रेजी में मूलतः लिखी गयी और हिंदी में अनुदित किताबे तो खूब बिकती है छोटे शहरों में,इस बात को नजरंदाज नही किया जा सकता है, ये साबित करता है कि आज भी अगर हिंदी में अच्छी कहानी लिखी जाए और उसकी अच्छी मार्केटिंग की जाए तो लेखक और प्रकाशक किसी की हानि नही होगी।

  16. I started tumarow read in hindi Maluha part 1
    thanks to make video in hindi
    Good luck and Make new translation Book English to Hindi list all books

  17. धन्यवाद यह वीडियो बनाने के लिये। आपके द्वारा बतायी गयी सभी बातें चिंतन योग्य हैं। इसमें दो बातें और जोड़ना चाहूँगा:-
    1- कोई भी बुकट्यूबर हिंदी पुस्तकों की समीक्षा नहीं करता। इसी कारणवश हिंदी पुस्तकें वो buzz नहीं बना पाती जिसकी वे हकदार हैं।
    2- हमें हिंदी का चेतन भगत चाहिये। भारत के कई लोग(मुझे मिलाकर) इसलिये पढ़ते हैं क्योंकि किसी दिन गलती से उनके हाथ में चेतन की पुस्तक आ गयी थी। हमें यह मानना पड़ेगा कि अगर चेतन भगत की भ्रूण हत्या हो गयी होती तो शायद भारत में पाठकवर्ग बहुत ज्यादा ही सीमित होता। आप william Shakespeare से शुरुआत नहीं कर सकते। वैसे कई दिनों से एक हिंदी पुस्तक cart में पड़ी थी आपकी वीडियो को रोककर ऑर्डर कर दी।

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